“चित्रकूट के घाट-घाट पर शबरी देखे बाट” एक अत्यंत भावुक और लोकप्रिय राम भक्ति भजन है, जो माता शबरी की निष्काम भक्ति, धैर्य और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट प्रेम को दर्शाता है। यह भजन हमें रामायण की उस प्रसिद्ध कथा की याद दिलाता है, जहाँ वर्षों तक प्रतीक्षा करने के बाद शबरी को प्रभु श्रीराम के दर्शन होते हैं।
चित्रकूट की पावन भूमि पर शबरी का प्रत्येक दिन प्रभु के इंतज़ार में बीतता है। उसका प्रेम इतना पवित्र और सच्चा होता है कि प्रभु श्रीराम उसके झोपड़े में स्वयं पधारते हैं और उसके द्वारा अर्पित किए गए प्रेम से भरे बेर सहर्ष स्वीकार करते हैं।
यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान को पाने के लिए वैभव या ज्ञान नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति और विश्वास ही पर्याप्त है। इसी कारण यह भजन सत्संग, भजन संध्या और राम कथा में विशेष रूप से गाया जाता है।

चित्रकूट के घाट घाट पर शबरी देखे बाट भजन लिरिक्स
चित्रकूट के घाट घाट पर,
शबरी देखे बाट,
राम मेरे आ जाओ,
राम मेरे आ जाओ,
चित्रकुट के घाट घाट पर,
शबरी देखे बाट,
राम मेरे आ जाओ ॥
अपने राम जी को,
कहाँ मैं बिठाऊँ,
कहाँ मैं बिठाऊँ,
टुटी फूटी खाट खाट प,
बिछया पुराना टाट,
राम मेरे आ जाओ,
चित्रकुट के घाट घाट पर,
शबरी देखे बाट,
राम मेरे आ जाओ ॥
अपने राम जी को,
क्या मैं खिलाऊँ,
क्या मैं खिलाऊँ,
छोटे छोटे पेड़ पेड़ प,
लगे सुनहरी बेर,
राम मेरे आ जाओ,
चित्रकुट के घाट घाट पर,
शबरी देखे बाट,
राम मेरे आ जाओ ॥
अपने राम को,
कया मैं पिलाऊं,
कया मैं पिलाऊं,
कपला गाढा दुध,
दुध में पड़ी मलाई खुब,
राम मेरे आ जाओ,
चित्रकुट के घाट घाट पर,
शबरी देखे बाट,
राम मेरे आ जाओ ॥
अपने राम जी को,
कहां मैं झुलाऊँ,
कहां मैं झुलाऊँ,
छोटी डाली आम आम प,
झूले सीता राम,
राम मेरे आ जाओ,
चित्रकुट के घाट घाट पर,
शबरी देखे बाट,
राम मेरे आ जाओ ॥
अपने राम जी को,
कैसे मैं रिझाऊँ,
कैसे मैं रिझाऊँ,
दीन हीन मोहे जान,
ना ही कोई भक्ति ज्ञान,
राम मेरे आ जाओ,
चित्रकुट के घाट घाट पर,
शबरी देखे बाट,
राम मेरे आ जाओ ॥
चित्रकूट के घाट घाट पर,
शबरी देखे बाट,
राम मेरे आ जाओ,
राम मेरे आ जाओ,
चित्रकुट के घाट घाट पर,
शबरी देखे बाट,
राम मेरे आ जाओ ॥
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. “चित्रकूट के घाट-घाट पर शबरी देखे बाट” भजन किससे संबंधित है?
यह भजन भगवान श्रीराम और माता शबरी से संबंधित है।
2. इस भजन का मुख्य भाव क्या है?
इस भजन का मुख्य भाव प्रतीक्षा, निष्काम भक्ति और प्रेम है।
3. चित्रकूट का क्या महत्व है?
चित्रकूट वह पावन स्थान है जहाँ वनवास के दौरान श्रीराम, लक्ष्मण और सीता ने समय बिताया और यहीं शबरी को प्रभु के दर्शन हुए।
4. शबरी के झूठे बेर का क्या अर्थ है?
झूठे बेर शबरी की निर्मल भक्ति और प्रेम का प्रतीक हैं, जिन्हें प्रभु श्रीराम ने भाव देखकर स्वीकार किया।
5. यह भजन कब गाया जाता है?
यह भजन प्रायः राम कथा, भजन संध्या, सत्संग और राम नवमी के अवसर पर गाया जाता है।
6. इस भजन को सुनने से क्या संदेश मिलता है?
यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान भाव के भूखे होते हैं, बाहरी आडंबर के नहीं।
7. क्या यह भजन बच्चों के लिए भी उपयुक्त है?
हाँ, यह भजन सभी आयु वर्ग के लिए प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद है।
निष्कर्ष
“चित्रकूट के घाट-घाट पर शबरी देखे बाट” भजन धैर्य, विश्वास और सच्ची भक्ति का जीवंत उदाहरण है, जो हर भक्त के हृदय को प्रभु श्रीराम के और निकट ले जाता है।
